ओशो कथाएँ-28 आत्म मूल्यांकन

आत्म मूल्यांकन.. . कसाई के पीछे घिसटती जा रही बकरी ने सामने से आ रहे संन्यासी को देखा तो उसकी उम्मीद बढ़ी. मौत आंखों में लिए वह फरियाद करने लगी- ‘महाराज ! मेरे छोटे-छोटे मेमने हैं. आप इस कसाई से मेरी प्राण-रक्षा करें. . मैं जब तक जियूंगी,अपने बच्चों के Continue Reading