ओशो कथाएँ-26

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“यदि कोई मस्तिष्क को प्रति घण्टा  20 से 30 सेकेंड के लिए भी खाली रखने में सफल हो जाता है जो थोड़े से अभ्यास से ही सम्भव है तो वह …
तनाव
अवसाद
नकारात्मक विचार
मानसिक अशांति जैसी अनेक दुःखद अनुभवों से बचा रहता है …
ऐसा साधक  जीवंतता से भरा होता है और शांतिपूर्ण ढंग से न केवल जीवन को जीता है बल्कि सभी विषयों में संतुलन के साथ प्रतिक्रिया करता है ।
ऐसा करने वाला  “द्वंद” से मुक्त होता है , उसका किसी भी सम्बंध में निर्णय बहुत स्पष्ट रहता है ।
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