श्री साईं कष्ट निवारणी

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श्री साईं कष्ट निवारणी
प्रार्थना :-
हे मेरे मालिक साईं बाबा, मैं बिल्कुल नादान हूँ, मै नही जानती कि तुमसे क्या माँगू, जो तुम मेरे लिए उचित समझो वही दे दो।मुझे वह शक्ति, भक्ति और सद् बुद्धि प्रदान करो कि तुम जो कुछ भी दो और जहाँ और जैसे तुम रखो उसी मे मैं खुश रहूँ। मुझमें कोई गुण नहीं, कोई अच्छाई नहीं, मेरे कर्म पाप और स्वार्थपूर्ण रहे होंगे।मुझमें कोई अच्छाई नहीं, मुझ जैसे पापी के लिए, हे मेरे मालिक, तेरे चरणों के सिवाय कोई ओट नहीं है। रहम करो और मुझे अपनी शरण मे ले लो। मुझे और कुछ नहीं चाहिए, मुझे अपना दास बना लो, ताकि मैं तेरा हो जाऊँ और तुम मेरे हो जाओ।

ॐ शिरडी वासाय् विद्महे सच्चिदानंदाय धीमही तन्नो साईं प्रचोद्यात्। (5बार)

ॐ साईं शिरडी साईं जय जय साईं।(5बार)

ॐ साईं नमो नमः। शिरडी साईं नमो नमः।
जय जय साईं नमो नमः।सद् गुरु साईं नमो नमः।(5 बार)

सद् गुरू साईंनाथ की वंदना करते हैं सभी सहित आनंद,
बाबा कृपा दृष्टि करते रहो, तुम हो परम सच्चिदानंद। (1)

प्रथम नमन करू पारब्रह्म को नारद शारद शेष। हाथ जोड़ विनती करूँ, हे गौरी पुत्र गणेश।(2)

मात-पिता, सद् गुरु की वंदना, करूँ चरण कमलों का ध्यान, साईं जी सफल करो इस ग्रंथ को देकर शक्ति, भक्ति और ज्ञान। (3)

पलकों की मेरी पालकी में, आन बसो मेरे साईं राम, हृदय का सिंहासन है खाली, आकर बैठो मेरे साईं राम। (4)

जग में हमारा कोई नहीं, सभी ग्रंथ-संत यह बतलाए, सादा जीवन, सच्ची करनी, साईं सिमरन ही पार लगाए। (5)

साईं भजने को चोला पाया, मोह में नहीं भरमाना है, यह घर तो पराया है भाई, इसको छोड़ के जाना है। (6)

मत लगा प्रीति विषयों में, इनमें वृथा जन्म गँवाना है, मिला है हीरा जन्म अनमोल जो फिर हाथ नहीं आना है। (7)

तोड़ दे संसार के बंधन नहीं किसी ने काम आना है। लग जाओ करने साईं भजन, साईं नाम ही तेरा ठिकाना है। (8)

यह मतलब का जमाना है, किसी ने नहीं संग जाना है। किए जा सिमरन बंदे साईं का अगर मुक्ति को पाना है। (9)

साईं के सिवाय संसार में यहाँ हर चीज़ पराई है।जप ले निशदिन साईं का नाम, यही असली कमाई है। (10)

शरण में आ जाओ साईं जी की, तुम्हें कभी धोखा नहीं होगा। यूँही जीवन बीत जाएगा फिर कभी मौका नहीं होगा। (11)

साईं जी को समर्पित करती हूँ मैं अपनी भावना के फूल। तुम मेरे प्राण हो साईं, मैं तेरे चरणों की धूल।(12)

सभी नामों से बढ़कर है प्यारा नाम साईं का, बेसहारो को संसार मे केवल सहारा साईं का।(13)

साईं ही माँ काली, साईं जगदम्बे है, साईं माँ सरस्वती, दूर्गे, अम्बे है। साईं माँ लक्ष्मी, चण्डी, भवानी है, साईं तेरा ही नाम राधे रानी है।(14)

साईं ही शारदे माँ, साईं ललिता, तेरा ही नाम माँ कात्यायनी है, नाम तेरा लेकर साईं मैया, पार हो गए लाखों प्राणी हैं। (15)

साईं राघव, केशव, शंकर महान हैं, साईं बुद्ध, नानक और महावीर हैं, साईं मुहम्मद, ईसा और हनुमान हैं, साईं दिगम्बर, पैगम्बर और कबीर हैं। (16)

साईं हैं करूणा के भंडार, साईं जी हैं सब सुखों के धाम, साईं महिमा है अपरम्पार, उनको मेरा कोटि कोटि प्रणाम ।(17)

साईं ही हैं पिता हमारे और माता है अंबे रानी, इन्हीं के आशीर्वाद से मिली है हमको यह जिंदगानी। (18)

साईं जी इस भवसागर मे हम दीन दुःखी है सारे, साईं नाम एक जहाज भाई, साईं भजे सो पार उतारे। (19)

नाथो के नाथ हैं साईं, दीनो के दीनानाथ हैं साईं,
भक्तों की झोली भरते हैं साईं, खुद खाली रहते हैं साईं । (20)

तुम शिरडी के बाबा साईं, सबका भला करने वाले हो, हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सभी के तुम रखवाले हो।(21)

शिरडी की पावन धरती पर जो भक्त साईं दर्शन को जाते हैं, सौ कदम बढ़कर साईं भक्तों को गले लगाते हैं।(22)

सभी को मिलता साईं का प्यार, इच्छित फल यहीं पाते हैं, हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, श्रद्धा के फूल चढ़ाते हैं।(23)

तेरी दया, करूणा के बाबा सारा जग गुण गाता है, शरण मे तेरी आकर बाबा हर प्राणी सुख पाता है। (24)

साईं भक्ति अहंकार का सचमुच करती है नाश, मोह ममता का भेदन करे, नाश करे कर्मपाश। (25)

क्या साधु, क्या संत, गृहस्थी, क्या राजा, क्या रानी, साईं जी की पुस्तक में लिखी सबके कर्मो की कहानी।(26)

साईं ने दुखियों का दर्द मिटाया, ऊँच नीच का भेद भुलाया, साईं दरबार मे जो भी आया, बाबा ने सबको गले लगाया।(27)

सब ही हैं ईश्वर के अंश, सबका मालिक है तू एक, भक्तों को साईं बाबा ने दी है शिक्षा बड़ी ही नेक।(28)

साईं किसी को कम नहीं देता, न किसी को दमड़ी ज्यादा, इसीलिए दुनिया का साईं जग का सेठ है कहलाता ।(29)

जब दया सिंधु हैं मेरे साईं, फिर मेरा मन क्यों घबराता है, मैं भक्त तेरा, तुम साईं भगवान, देखो कितना सुंदर नाता है।(30)

इस सुख दुःख के घेरे मे कष्ट बाधाओं से हूँ परेशान, साईं मैं भटक रही अंधेरे में, अधरो पर नहीं है मुस्कान।(31)

रहम नजर करो उजडे वीरान पे, जिंदगी संवरेगी साईं वरदान से, मोह माया के इस अभिमान से, बचा लो बाबा मुझे अज्ञान से।(32)

न भक्ति है, न गुण मेरे मे और न ही कुछ कीन्ही सेवा, फिर भी मैं शरण तेरी हूँ, नमो नमो हे साईं देवा ।(33)

दुष्ट जनों ने भी श्रद्धा, भक्ति से यदि बाबा तुम्हें कभी पुकारा, सद् गुरू साईं नाथ जी ने सदैव उन्हें भी है उबारा। (34)

न धैर्य है, न श्रद्धा जिनमें, डूब जाते हैं वे मझधार। श्रद्धा से साईं सिमरन जो करे, वे जन हो भवसागर पार।(35)

मिटेंगे दिल के दुःख शोक सारे, साईं जी की शरण मे आने से, मत कर संकोच तू प्यारे, नाम साईं जी का ध्याने से।(36)

यदि साईं नाम दिल से पुकारो, सहारा आप मिल जाएगा, नैया कर दो साईं हवाले, किनारा आप मिल जाएगा ।(37)

साईं जब से याद भुलाई तेरी, साईं लाखों कष्ट उठाए हैं।क्या जानूँ जीवन मे मैंने, साईं कितने पाप कमाए हैं।(38)

ढोते ढोते पापो का भार, अब जीवन से गई हूँ हार, साईं आशिर्वाद देकर मेरी, सूनी जिंदगी मे लाओ बहार।(39)

हमारा तुम्हारा रिश्ता साईं जन्मों जन्म से पुराना है, तोड़ के मोह माया के बंधन, साईं जी की शरण मे आना है।(40)

माना पापी हूँ मैंने पाप किए, साईं फिर भी मेरा उद्दार करो, इस हाल मे भी तेरा नाम लिया, साईं अब मत इन्कार करो। (41)

साईं ने उजडे घरों को बसाया, पानी से दीपक भी जलाया, साईं ने शिरडी को धाम बनाया, छोटे से गाँव मे स्वर्ग सजाया। (42)

साईं जी बालक मैं अनाथ हूँ, रहती तेरे भरोसे दिन रात हूँ, तू है सवेरा और मैं रात हूँ, मेल नहीं है, फिर भी साथ हूँ।(43)

साईं मुझसे मुख न मोड़ो, कीजिए निवारण मेरे संताप का, बीच मझधार अकेला न छोड़ो, जैसा भी हूँ, हूँ तो आपका। (44)

साईं कोई नहीं बिन तेरे, बाबा बन जाओ प्राण आधारे, संकट टालो, शरण लगा लो, साईं बिना हमें कौन उबारे। (45)

आपकी दास हूँ अब न टालिए, गिरने लगी हूँ, साईं संभालिए, भवसागर से पार उतारिए, साईं दया दृष्टि से निहारिए। (46)

बाबा तेरे गुण हैं अनंत भला इन्हें कैसे गाँऊ मैं, समझ मे न आए साईं किस विधि से तुझे पाऊँ मैं। (47)

बाबा के दर पर जाना है, अपने कर्मो को नहीं छुपाना है, बुरे कर्मो से बचाना है, साईं चरणों पर शीश झुकाना है।(48)

तेरे अपने साथ न देंगे, चिपके रहेंगे धन पाने में, सेवा करे न कोई बूढ़ापे में, नज़र होगी तुम्हारे खजाने में। (49)

इस युग मे हम विचलित हैं बाबा और चारों ओर अंधेरा है, दुःख के सागर मे साईं बाबा बस सहारा केवल तेरा है।(50)

सभी जीव अपने अज्ञान से पाते हैं बहुतेरे कष्ट, साईं शरण से पल भर मे, हो जाते उनके पाप नष्ट। (51)

लख चौरासी के चक्कर काटे, तब मानुष तन है पाया, लोभ, मोह, माया के चक्कर मे, व्यर्थ ही जीवन गँवाया। (52)

बाबा भक्ति, मुक्ति दे दो, मुझे माल खजाने का क्या करना, जब मिल जाए सहारा साईं का, झूठे सहारो का क्या करना। (53)

साईं जी कर्म किए हैं जैसे हमने, वैसा हम फल पाएँगे, फिर भी दया दृष्टि कर दो साईं हम भी भव से तर जाएँगे । (54)

हे सत्गुरू सच्चिदानंद साईं, दे दो भक्ति का आनंद साईं, डगमगाती नैया संभालो साईं, भवसागर पार करा दो साईं। (55)

बन कर सारथी आ जाओ साईं, थामे लो डोरी मेरे जीवन की, तेरा साथ रहे, सिर पर हाथ रहे, बगिया महकेगी जीवन की।(56)

तेरे खजाने मे अल्लाह की रहमत, शहंशाह आलम कुछ तो कर रहम, दर के भिखारी, मोहताज हैं हम, सत्गुरू साईं तुम हो समरथ । (57)

साईं आए धरती पर देने सहारा, करने लगे क्यों हमसे किनारा, जब तक ये ब्रह्मांड रहेगा हमारा, साईं नाम गाएगा जग सारा । (58)

चाँद सितारे तुम्हें रहें पुकार, जन्मों जन्म रास्ता रहें निहार, आत्मा बदलेगी चोले हज़ार, साईं मिलते रहेंगे हर बार।(59)

कृपा करो हे दया सिंधु साईं, तुम सभी के काम बनाते हो, बीच भँवर मे है नैया मेरी, क्यों नहीं पार लगाते हो।(60)

क्या नहीं तुम्हारे पास बता दो, साईं तुम हो दाता हम भिखारी, अच्छा एक बात बता दो, सुनते नहीं क्यों अर्ज हमारी।(61)

साईं नहीं देना है तो इन्कार कर दो, खत्म आपस की तकरार कर दो, लौट के खाली चली जाऊंगी, फिर भी गुण तेरे गाँऊगी। (62)

साईं तुमने कहा था, “आऊँगा मैं, श्रद्धा से जब भी मुझे पुकारो”, श्रद्धा से रही पुकार मैं साईं, देकर शरण मुझे पार उतारो। (63)

मेरे जीवन की मुश्किल घड़ी है, साईं आए हैं हम तेरे द्वार, माना दर पर तेरे भीड़ बढ़ी है, फिर भी सुन लो साईं मेरी पुकार। (64)

एक वर दे दो साईं मुझको, नित जपती रहूँ साईं तुझको, माया के दल मे मैं फंसी हूँ, निकालो इस से साईं मुझको ।(65)

साईं नाम की भीख दे दो बाबा, मैं बनकर भिखारी आई हूँ, नाम लेती जाऊँ बाबा तेरा, साईं नाम कमाने आई हूँ। (66)

जपूँ मैं साईं नाम की माला, गुण सदा तेरे गाँऊ, साईं साईं रटते रटते साईं ही में मिल जाऊँ । (67)

साईं सत्य मार्ग हमें दिखाइए, संत सुजान का पाथ, पाप कर्म से हमें बचाइए, साईं जी पकड़ कर हमारा हाथ। (68)

सिमरन कर ले, सिमरन कर ले, सिमरन कर ले साईं का नाम, सब कष्ट तुम्हारे मिट जाएँगे, बन जाएँगे बिगड़े काम। (69)

जब जब मैने साईं को भुलाया, कर्म अग्नि ने खूब जलाया भाग्य जगे जब साईं ने बुलाया, अपने चरण शरण मे लगाया। (70)

प्रतिदिन श्रद्धा भक्ति से जो करते श्री साईं कष्ट निवारणी का जाप, स्वयं रक्षा करते हैं बाबा उनकी, बनकर संकटमोचन आप। (71)

ये मंत्र जो प्राणी निशदिन गाएंगे, राहू, केतु, शनि निकट नहीं आएँगे, तेरे सब दुःख, संकट टल जाएँगे, फूल खुशी के खिल जाएँगे।(72)

जो इसका श्रद्धा से करेगा पठन, चिंता, रोग, दोष नष्ट हो जाएँगे, उस पर देव सभी हों प्रसन्न, श्री साईं कष्ट निवारणी जो गाएंगे।(73)

बंदे कर ले साईं जी का भजन, अब तू हो जा उसमें मगन, तेरे दुःख, पाप, बाधा सारी, सभी फिर भगन।(74)

बाबा मेरे पाप कर्मो को माफ करो, बुरे कर्मो का लेखा साफ करो, साईं शरण आई, मेरा उद्धार करो, बाबा भवसागर से पार करो ।(75)

इस ग्रंथ को जो निशदिन बांचे, लक्ष्मी जी घर सदा बिराजे, गरीबी मिटे, उनके पाप कटे, साईं भक्तों की पत राखे।(76)

ज्ञान बुद्धि वो प्राणी पाएगा, श्री साईं कष्ट निवारणी जो ध्यायेगा, ये मंत्र भक्तों कमाल करेगा, आई जो अनहोनी उसकी टाल करेगा। (77)

साईं राम, साईं श्याम जपो भाई, भूत-प्रेत भी रहेंगे सदा दूर। साईं नाम मिश्री है बोल- बोल पी, इस मंत्र में है शक्ति भरपूर।(78)

आए हैं शरण बाबा रक्षा करो, खुशियों के भंडार भरो, साईंनाथ मूझे क्षमा करो, मेरे पाप, ताप, श्राप हरो । (79)

जब साईं जी हैं हमारे साथ, फिर किस बात की चिंता, साईं चरणों पे रख दिया माथ, फिर किस बात की चिंता। (80)

मेरी नैया के हैं साईं खेवैया, फिर किस बात की चिंता, मेरे बाबा को रहती है मेरी हर बात की चिंता।(81)

साईं हैं दीनबंधू दीनानाथ, फिर किस बात की चिंता, मेरी लाज है बाबा के हाथ, फिर किस बात की चिंता। (82)

उनके ऊपर पड़ नहीं सकती पापों की कोई परछाई, जिनकी रक्षा खुद करते हों शिरडी वाले बाबा साईं। (83)

श्रद्धा, प्रेम से जो भी जन नाम साईं बाबा का लेते हैं, पर्वत भी उनको शीश झूकाते, सागर भी रास्ता देते हैं।(84)

साँसे जो रह गईं, उन्हें बचा लो, हर साँस को साईं नाम से सजा लो, जीवन को पापों से बचा लो, साईं के दर पे शीश झूका लो। (85)

मुश्किल कितनी भी आए, कभी नहीं होना उदास, साईं बाबा अपने भक्तों की कर देते हैं पूरी आस। (86)

हो जाती है दूर निराशा, मिट जाते हैं सभी झमेले, साईं जी के चरणों मे सदा लगते, भक्तों की आशाओं के मेले। (87)

संशय न लाना, विश्वास जगाना, ये वचन साईं वचन ही जानो, ये मंत्र है सुखों का खजाना, स्वयं अमल करो, सत्य पहचानो। (88)

बाबा तैंतीस करोड़ देवता, गुण तेरे ही गाए साईं, कोटि सूर्य, कोटि चंद्रमा, सब तुझमें समाए साईं। (89)

चार वेद और लाखों ग्रंथ, सबमें महिमा तेरी गाई, सहस्त्र लाख योगी-मुनि भी भेद तेरा नहीं पाए साईं । (90)

माया चिंतन छोड़ कर साईं को दो अपना मन सच्ची कमाई करो सदा जिससे निर्मल होये तन। (91)

साईं नाम, साईं का प्रशाद, और उनकी आरती, ये तीन, पार लगाते हैं जीव को करते हैं ब्रह्म में लीन।(92)

साईं जी हैं हरि का रूप, सिमरन करो साईं नाम, दुःख हरते, सुख देते हैं अपने शिरडी साईं भगवान। (93)

साईं समाधि मंदिर बड़ा निराला है, मनोकामना पूरी करने वाला है, द्वारिका माई सबकी माता है, आकर भक्त पाप मिटाता है। (94)

भाग्य रेखाएँ बदल जाती हैं, साईं नाम भजन करने से, गम भी खुशियों मे बदलते हैं लिख कर साईं जाप करने से। (95)

गृहस्थी, संत, मुनिजन सभी साईं जी को ध्याते हैं, जन्म-जन्म के पाप मिटाने सब साईं शरण में आते हैं । (96)

समाधि मंदिर वाले साईंबाबा बिगड़ी हमारी बना जाओ, चावड़ी वाले साईं बाबा आशा के दीप जला जाओ।(97)

द्वारिका वाले साईं बाबा मेरे घर को पवित्र बना जाओ, साईं मेरे घर आंगन से पाप, ताप, श्राप मिटा जाओ । (98)

गुरू स्थान वाले साईं बाबा मुक्ति का ज्ञान सिखा जाओ, हम सब अनाड़ी हैं साईं जीवन सफल बना जाओ। (99)

हे परम पिता साईं चरणों में हमको भी तुम दे दो स्थान, बुरे कर्मो को माफ करो साईं, हम रहें हैं बड़े नादान। (100)

हे मेरे साईं भगवान, पाहि पाहि करूँ दिन रात, बाबा साईं तेरे चरणों का मैं ध्यान करूँ दिन रात। (101)

साईं राम नाम प्यारा लागे, साईं नाम सिमरन कर लो, पापी भी पार उतर गए इससे, लेकर साईं नाम पार उतर लो। (102)

साईं बाबा तेरे चरणों मे मैं शीश झूकाने आई हूँ, जो पाप किए जीवन में उनको माफ कराने आई हूँ। (103)

साईं अब ऐसी कृपा करो, मैं सदा साईं को ही ध्याऊँ, अपनेपन को छोड़कर मैं साईं ही में मिल जाऊँ। (104)

साईं नाथ तेरी पूजा करके जग में शक्ति पाऊँ मैं, तेरी शक्ति, भक्ति, आशीष पाकर जीवन सफल बनाऊँ मैं । (105)

साईं दया करो, कृपा करो, क्षमा करो साईं मेरे अपराध, साईं जी ऐसी शक्ति दीजों कभी फिर करूँ नहीं पाप। (106)

इस पुस्तक मे है साईं जी का वास, साईं दया से ही लिख पाई यह दास, इस ग्रंथ को पढ़े, छपवाए जो साईं दास, साईं जी उनकी पूरी करे सब आस। (107)

इस ग्रंथ मे हुई भूल यदि मुझसे, साईं जी बच्चा समझ करो माफ, मैंने कुछ लिखा लिखाया नहीं, सब किया कराया साईं जी आप। (108)

माला इसकी पूरी हुई, मनका एक सौ आठ।
मनोकामना पूरी हो, जो नित्य करे इसका पाठ।

ॐ सर्वेशां सर्वस्ति भवतू। सर्वेशां शांति भवतू। सर्वेशां मंगलं भवतू। सर्वेशां पूर्णं भवतू।।

ॐ सर्वे भवन्तू सुखिन्। सर्वे सन्तू निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तू। मा कश्चिदुखभागभवेत्।।

हे साईं देव, मैं अज्ञानी आपका आह्वान, पूजन तथा अर्चना, कुछ भी नहीं जानती, अतः मेरी अर्चना जैसी भी है, उसे स्वीकार करके मुझे क्षमा करें।

हे साईं देव, आपके बिना मुझे शरण मे लेने वाला कोई नहीं अतः हे करूणानिधान, मुझ पर दया करूणा करके मेरी रक्षा करें।

हे साईं देव, मैंने अज्ञान, भूलवश अथवा बुद्धिभ्रम से जो भी अपराध किए हैं, उन्हें भूलाकर मुझे क्षमा करें।

हे साईंनाथ, मुझ अज्ञानी को अपनी शरण मे लेकर पिछले सभी पाप, दुष्करम, गल्तियाँ अथवा भूल आदि को भूलाकर मुझे क्षमा करो, मुझे सद् बुद्धि और अपनी शरण प्रदान करो।

ॐ शांति। शांति। शांति।।
श्री सद् गुरू साईंनाथार्पणमस्तू। शुभं भवतु।

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