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😅😅हास्यमेव जयते

चौथा प्रश्नः ओशो! मैं विवाहित व्यक्ति हूं। मैं तो वैवाहिक जीवन में कोई दुख नहीं देखता हूं, फिर आप क्यों वैवाहिक जीवन का मजाक उड़ाते हैं?

नारायणदत्त तिवारी! भैया, ऐसा मालूम पड़ता है, पत्नी भी तुम्हारे साथ यहां आई हुई है। सच कहना, ईमान से कहना।
अदालत में सरकारी वकील ने मुल्ला नसरुद्दीन पर आरोप लगाते हुए कहा कि माई लार्ड, यही वह आदमी है जिसने अपनी पत्नी को चिड़ियाघर के गहरे तालाब में ढकेला था और जिसे मगरमच्छ खा गए थे।
जज के हृदय में तो आनंद की एक लहर उठी। मगर दुर्भाग्य की बात, उस दिन उसकी पत्नी भी अदालत में मौजूद थी, अदालत देखने आई थी। सो जज ने कहाः लेकिन क्या यह बदमाश यह नहीं जानता था कि चिड़ियाघर के जानवरों को कुछ भी खिलाने की मनाही है?
चंदूलाल एक दिन अपने मित्र नसरुद्दीन से कह रहे थे कि जैसी आज्ञाकारी हमारी पत्नी है, शायद ही किसी की हो। पत्नी भी मौजूद थी, स्वेटर भी बुनती जाती थी और सुनती भी जाती थी कि क्या बात चल रही है। पत्नियां चार-चार पांच-पांच काम इकट्ठे कर लेती हैं। जैसे स्वेटर बुन लें, पैर से लड़के का झूला भी झुलाती रहें, कान से–पति क्या चर्चा कर रहा है…और जितनी धीमी खुसर-पुसर चर्चा हो रही हो, उतनी साफ उनको सुनाई पड़ती है। जोर से बोलो तो वह सुनने की जरूरत नहीं।
चंदूलाल की यह बात सुन कर नसरुद्दीन चैंका। उसने कहा कि तुम्हारा मतलब? चंदूलाल ने कहाः अरे जब भी कहता हूं कि मुझे गर्म पानी चाहिए, फौरन करके देती है। रोज कहूं तो रोज करके देती है।
नसरुद्दीन बोलाः लेकिन एक बात समझ में नहीं आती कि आखिर तुम रोज गर्म पानी का करते क्या हो? तुम्हें देख कर तो ऐसा लगता नहीं कि नहाना-धोना भी तुम्हें आता हो!
चंदूलाल बोलेः अरे यार, तुमने भी मूर्खता की हद कर दी! अरे क्या इतनी ठंड में कोई ठंडे पानी से बर्तन साफ कर सकता है? बर्तनों को धोने के लिए आखिर गर्म पानी ही चाहिए न!
भैया नारायणदत्त तिवारी, अकेले आओ कभी। फिर जो मैं कहता हूं, जंचेगा। अभी पत्नी बिलकुल बगल में ही बैठी होगी और तुम्हारे चेहरे की तरफ देख रही होगी।
मुल्ला नसरुद्दीन और उसकी बीबी सैर करने को निकले थे। बातचीत चल रही थी कि अचानक बीबी ने किसी बात पर गर्म होकर नसरुद्दीन को जोर से एक चपत रसीद कर दी। नसरुद्दीन तो क्रोध से भनभना गया। बोला कि तूने यह चपत सच में मारी या मजाक में मारी?
गुलजान भी क्रोध में आकर बोलीः सच में मारी है, बोल क्या करना है?
नसरुद्दीन नर्म होकर बोलाः कुछ नहीं, यही कि मुझे मजाक इस तरह के बिलकुल पसंद नहीं। यदि सच में मारी है तो कोई बात नहीं।
तुम कह रहे होः मैं विवाहित व्यक्ति हूं। जरूर होओगे! तुम कह रहे होः मैं तो वैवाहिक जीवन में कोई दुख नहीं देखता हूं। फिर आप क्यों वैवाहिक जीवन का मजाक उड़ाते हैं?
सौभाग्यशाली हो। अगर वैवाहिक जीवन में तुम्हें कोई दुख नहीं दिखाई पड़ता तो तुम यहां आए किसलिए हो? क्यों यहां समय खराब कर रहे हो? वैवाहिक जीवन का सुख लो। मगर खाने के दांत और, दिखाने के दांत और। कहते लोग कुछ और, असलियत कुछ और। कहता कोई भी नहीं। कहे कैसे? जबानें बंद हैं। और फिर फजीहत करवाने से सार क्या?
सभी कहानियां, पुरानी कि नई, विवाह पर खत्म हो जाती हैं। फिल्में भी विवाह पर खत्म हो जाती हैं। शहनाई बजती है, माला डाली जा रही, फेरे लगाए जा रहे, और कहानी खत्म! क्योंकि फिर इसके बाद जो होता है, वह न दिखाने योग्य है, न बताने योग्य है, न किसी से कहने योग्य है। कहानियों में कहा जाता है कि दोनों का विवाह हो गया, फिर दोनों सुख से रहने लगे। तुमने एकाध भी ऐसी कहानी देखी, जिसमें यह आया हो कि विवाह हो गया और फिर दोनों दुख से रहने लगे? ऐसी कहानी ही नहीं लिखी गई आज तक। अगर यह बात सच है कि विवाह हो जाने के बाद दोनों सुख से रहने लगते हैं, तो यह जीवन, यह जगत अपूर्व आनंद से भरा हुआ होना चाहिए। मगर ऐसा कहीं दिखाई पड़ता नहीं। और इस समाज, इस व्यवस्था, इस जीवन की आधारशिला विवाह है। मगर हम छिपाते हैं, हम मुखौटे लगाए रहते हैं।
मैं जो मजाक उड़ाता हूं वह सिर्फ तुम्हारे मुखौटों की उड़ा रहा हूं। अब यह भी हो सकता है संयोगवशात तुम अपवाद होओ। मिल गई हो कोई अप्सरा तुम्हें या तुम स्वयं कोई देवता होओ। और दोनों का जीवन सच में ही सुख से बीत रहा हो। मैं यह भी नहीं कहता, क्योंकि मैं कौन हूं संदेह करूं तुम पर? श्रद्धा रखता हूं! तुम्हारी तुम जानो! मगर इतना ही निवेदन है कि अगली बार अकेले आना। और फिर बातें तुम्हें ज्यादा और ढंग से दिखाई पड़ेंगी।
”ओशो🌹🙏🌹

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