ओशो कथाऐ—11

एक संन्यासी ईश्वर की खोज में निकला हुआ था और एक आश्रम में जाकर ठहरा। पंद्रह दिन तक उस आश्रम में रहा, फिर ऊब गया। उस आश्रम का जो बूढ़ा गुरु था वह कुछ थोड़ी सी बातें जानता था, रोज उन्हीं को दोहरा देता था। फिर उस युवा संन्यासी ने Continue Reading

ओशो कधाऐ—-10

ओशो प्रेम और ध्यान •====((0))====• एक बहुत अरबपति महिला ने एक गरीब चित्रकार से अपना चित्र बनवाया, पोट्रट बनवाया। चित्र बन गया, तो वह अमीर महिला अपना चित्र लेने आयी। वह बहुत खुश थी। चित्रकार से उसने कहा, कि क्या उसका पुरस्कार दूं? चित्रकार गरीब आदमी था। गरीब आदमी वासना Continue Reading

ओशो कथाएँ-9

महावीर कहते हैं, प्रक्रिया उलटी होनी चाहिए। पुण्य को भीतर छिपाकर रख लेना, पाप को बाहर प्रगट कर देना। पाप को तो बता देना, क्योंकि जो बता दो वह खो जाता है। पुण्य बताया, पुण्य खो जाएगा। पाप बताया, पाप खो जाएगा। जो बचाकर भीतर रखते हो, वही बीज बनता Continue Reading

ओशो कथाएँ-8 अविस्मरणीय मन को शान्ति देने वाली कथा

ओशो… Osho Ktha  मृत्यु के देवता ने अपने एक दूत को भेजा पृथ्वी पर। एक स्त्री मर गयी थी, उसकी आत्मा को लाना था। देवदूत आया, लेकिन चिंता में पड़ गया। क्योंकि तीन छोटी-छोटी लड़कियां जुड़वां–एक अभी भी उस मृत स्त्री के स्तन से लगी है। एक चीख रही है, Continue Reading

ओशो कथाएँ -7 वीर्य की कहानी ओशो की जुबानी

वीर्य बना किस से है ओशो एक वीर्य-कण दो चीजों से बना है। तभी तो आपका पूरा शरीर भी दो चीजों से बन पाता है — एक तो वीर्य-कण की देह — दिखाई पड़ने वाली और एक वीर्य-कण की आत्मा है, ऊर्जा है — न दिखाई पड़ने वाली। वीर्य जीवित Continue Reading

ओशो कथाएँ-6 भय और प्रेम …. ओशो

Osho भय और प्रेम भय और प्रेम साथ-साथ हो कैसे सकते हैं? Osho is ke liye btate h इतना भय कि पति कहीं किसी स्त्री की आँख में न आँख डाल कर देख लें! तो फिर प्रेम घटा ही नहीं है। फिर तुम्हारी आँख में आँख डालकर पति ने नहीं Continue Reading

ओशो कथाएँ -5 🔴प्रश्नः निर्विचार कितनी देर तक रहा जाए, क्या चैबीस घंटे तक रहा जाए? ओशो♣️

🔴प्रश्नः निर्विचार कितनी देर तक रहा जाए, क्या चैबीस घंटे तक रहा जाए? नहीं, चैबीस घंटे की बात नहीं है। अगर दस मिनिट भी परिपूर्ण निर्विचार में जा सकते हैं आप तो चैबीस घंटे धीरे-धीरे आप पाएंगे सब काम करते हुए–पड़े रहने की कोई जरूरत नहीं है–सब काम करते हुए। Continue Reading

ओशो कथाएँ-3 प्रश्न :- भगवान मे सन्यास लेना चाहता हू

🔴प्रश्नः भगवान, मैं संन्यास तो लेना चाहता हूं पर संसार से बहुत भयभीत हूं। संन्यास लेने से मेरे चारों ओर जो बवंडर उठेगा उसे मैं झेल पाऊंगा या नहीं? आप आश्वस्त करें। संन्यास का अर्थ है, असुरक्षा में उतरना। संन्यास का अर्थ है, अज्ञात में चरण रखना। संन्यास का अर्थ Continue Reading

ओशो कथाएँ-2 अहंकार और निरंहकार Osho Katha

सुना है मैंने, एक सम्राट प्रार्थना कर रहा था एक मंदिर में। वर्ष का पहला दिन था और सम्राट वर्ष के पहले दिन मंदिर में प्रार्थना करने आता था। वह प्रार्थना कर रहा था और परमात्मा से कह रहा था कि मैं क्या हूं! धूल हूं तेरे चरणों की। धूल Continue Reading