Osho राम राम जिन्दगी भर कहने से क्या फायदा

Spread the love

Osho राम राम जिन्दगी भर कहने से क्या फायदा

 

⇔  osho राम राम जिन्दगी भर कहने से क्या फायदा है

       प्रिय मित्र कई लोग जिन्दगी भर राम राम  करते है

आप का सवाल कि osho राम राम जिन्दगी भर कहने से क्या फायदा इस पर एक कथा कहता हू

बंगाल में एक बहुत बड़ा वैयाकरण हुआ। कभी मंदिर नहीं गया। उसके पिता बूढ़े होने लगे थे, नब्बे साल की उम्र हो गयी पिता की। बेटा भी अब कोई सत्तर पार कर रहा है। आखिर पिता ने कहा कि तू कब जाएगा मंदिर, कब राम को पुकारेगा? तो बेटे ने कहा : मैं हूं व्याकरण का ज्ञाता हूँ   aur sab logo ki trh राम राम जिन्दगी भर कहने से क्या फायदा  लगूं आखिर  एक वचन में “राम”, “राम” जिंदगी भर कहने से क्या फायदा? बहुवचन में एक ही बार राम को पुकार लेंगे। और एक ही बार पुकारूंगा! और पुकार सच्ची होगी तो एक ही बार में पहुंच जाएगी। और पुकार अगर झूठी है तो करोड़ बार में भी कैसे पहुंच सकती है? नाव अगर कागज की है तो करोड़ बार चलाओ, डूब—डूब जाएगी। नाव सच्ची हो तो बस एक बार छोड़ी कि उस पार पहुंची। ऐसे अंधेरे में तीर चलाने से क्या फायदा है? एक बार समग्र शक्ति लगाकर सारी आंखों को एकजुट करके, एकाग्र करके पुकार लूंगा राम को। पिता ने कहा : मैं बूढ़ा हो गया हूं, तू भी सत्तर साल का हुआ, अब इन व्यर्थ की बातों में मत लगा रह। जब भी तुझसे कहता हूं, तभी तू यह बात कहता है—एक बार पुकार लूंगा! आखिर कब पुकारेगा? तो उसने कहा : आज ही पुकार लेता हूं।

बेटा मंदिर की तरफ चल पड़ा 


। जैसे बाप भी रोज मंदिर जाता था. . .जिंदगीभर का नियम था। बाप राह देखता रहा कि बेटा लौटता होगा, लौटता होगा, लौटता होगा। नहीं लौटा। दोपहर होने लगी, सूरज ढलने लगा


तो बाप भागा मंदिर गया कि बात क्या हुई? तब तक मंदिर से भी लोग आ रहे थे, उन्होंने कहा कि तुम्हारा बेटा तो चल बसा। उसने तो बस एक बार मूर्ति के सामने खड़े होकर जोर से “राम” को पुकार दी और वहीं गिर गया। फिर उठा नहीं।

ऐसा रास्ता है जुआरी का। रामदुवारे जो मरे! वह परम जीवन को उपलब्ध हो जाता है।

ओशो

 Osho राम राम जिन्दगी भर कहने से क्या फायदा 

 

इसी तरह एक सेठ जो अपने मुख से कभी राम नाम नहीं लेता था 

लोग हमेशा उसे कहा करते थे।

आखिर तुम राम का नाम क्यों नहीं लेते? राम का नाम भगवान का नाम है, तुम्हीं इसे लेना चाहिए। उसकी पत्नी भी हमेशा कहा करती थी कि राम का नाम लिया करो राम कभी तुम्हारे मुंह से निकलता ही नहीं सिर्फ हंसकर टाल देता था और कभी भी इसका जिक्र किसी से नहीं करता था कि वह क्या चाहता है। आखिर एक दिन सोते-सोते उसकी पत्नी ने उसकी तरफ देखा तो अचानक सेठ 

के मुंह से निकला राम।

एक दिन सोते-सोते अचानक ही सेठ के मुंह से निकला “राम” यह शब्द उसकी पत्नी ने सुन लिया तो उसे बहुत हैरानी हुई कि यह तो कभी राम का नाम लेता नहीं। आखिर सोते-सोते उसके मुंह से कैसे राम का नाम निकल गया। सुबह हुई सुबह होते ही उस सेठानी ने सेठ से कहा, रात को आपका सोते-सोते मुख से निकला राम आखिर आपने राम का नाम ले ही लिया। इस सेठ के मुंह में से सिर्फ को बहुत हैरानी हुई।  aur achank use heart attack aa gya…क्या राम में निकल गया, इतना बोलते हैं उसी क्षण से अपने प्राण त्याग दिए।

इस कहानी से हमें यह भी समझ में आता है osho राम राम जिन्दगी भर कहने से क्या फायदा .. कि लोग दिखावे के लिए राम का नाम तो लेते हैं लेकिन असल में जो राम का नाम लिया जाता है, वह अपने अंदर लिया जाता है और इतनी तरीके से लिया जाता है कि बाहर किसी को भनक ना हो। दिखावे की पूजा आज के समय में हर कोई कर लेता है लेकिन जो असल पूजा है वह बहुत छुपा कर और अपने अंदर की जाती है issi liye kaha gya hai osho( राम राम जिन्दगी भर कहने से क्या फायदा )

 

  

 

 

 

Leave a Comment