Osho kya dukh roke ja skte hai

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प्रश्न : osho क्या ये दुख रोके नहीं जा सकते ? मै दुनिया के लोगों को दुखी हो जाता हूँ कृपया कुछ समाधान बताऐ मै दुनिया के दुख देख कर रोता हूँ ?

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प्रश्न : osho क्या ये दुख रोके नहीं जा सकते ? मै दुनिया के लोगों को दुखी हो जाता हूँ कृपया कुछ समाधान बताऐ मै दुनिया के दुख देख कर रोता हूँ ?

प्रश्न से तुम्हारे ऐसा लगता है कि कम से कम तु म दुखी नहीं हो। दुनिया के दुख देखकर रोने का हक उसको है जो दुखी न हो। नहीं तो तुम्हारे रोने से और दुख बढ़ेगा, घटेगा थोड़े ही।

   और तुम्हारे रोने से किसी का दुख कटनेवाला है? दुनिया सदा से दुखी है। इस सत्य को, चाहे यह सत्य कितना ही कडुवा क्यों न हो, स्वीकार करना दया होगा।

     दुनिया सदा दुखी रही है। दुनिया के दुख कभी समाप्त नहीं होंगे। व्यक्तियों के दुखसमाप्त हुए हैं। व्यक्तियों के ही दुख समाप्त हो सकते हैं।         

हां, तुम चाहो तो तुम्हारा दुख समाप्त हो सकता है। तुम दूसरे का दुख कैसे समाप्त करोगे?

        और मैं यह नहीं कह रहा हूं कि लोगों को रोटी नहीं दी जा सकती, मकान नहीं दिये जा सकते। दिये जा सकते हैं, दिये जा रहे हैं दिये गये हैं।

     लेकिन दुख फिर भी मिटते नहीं। सच तो यह है, दुख और बढ़ गये हैं। जहां लोगों को मकान मिल गये हैं रोटी—रोजी मिल गई है, काम मिल गया है, धन मिल गया है वहां दुख और बढ़ गये हैं, घटे नहीं है।

     आज अमरीका जितना दुखी है उतना इस पृथ्वी पर कोई देश दुखी नहीं है। हां, दुखी ने नया रूप ले लिया। शरीर के दुख नहीं रहे, अब मन के दुख हैं। और मन के दुख निश्चित ही शरीर के दुख से ज्यादा गहरे होते हैं।

    शरीर को गहराई ही क्या! गहराई तो मन की होती है। अमरीका में जितने लोग पागल होते हैं उतने दुनिया के किसी देश में नहीं होते। और अमरीका में जितने लोग आत्महत्या करते हैं उतनी आत्महत्या दुनिया में कहीं नहीं की जाती।

     अमरीका में जितने विवाह टूटते हैं उतने विवाह कहीं नहीं टूटते। अमरीका के मन पर जितना बोझ और चिंता है उतनी किसी के मन पर नहीं है। और अमरीका भौतिक अर्थों में सबसे ज्यादा सुखी है।

      पृथ्वी पर पहली बार पूरे अब तक के इतिहास में एक देश समृद्ध हुआ है। मगर समृद्धि के साथ—साथ दुख की भी बाढ़ आ गई।

मेरे लेखे जब तक आदमी जागृत न हो तब तक वह क़ुछ भी करे, दुखी रहेगा। भूखा हो तो भूख से दुखी रहेगा और भरा पेट हो तो भरे पेट के कारण दुखी रहेगा ।

Osho || ओशो

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चौथा प्रश्नः—osho Dukh से मुक्ति कैसे मिले?

      Osho   -गरीब की आकांक्षाएं भी गरीब होती हैं खयाल रखना। अब गरीब आदमी ऐसा झाड़ के नीचे बैठा हुआ सपने नहीं देखता कि मैं सम्राट हो जाऊं।

     यह बात जरा इतनी फिजूल लगती है इतनी मूढ़तापूर्ण लगती है कि यह होने वाली नहीं है। ठीकरा पास नहीं है सम्राट होने की बात से क्या मतलब है कुछ हल नहीं होता।

         गांव का भिखारी यही सोचता है कि इस गांव में मैं सबसे धनी भिखारी कैसे हो जाऊं ज्यादा से ज्यादा सौ-पचास भिखारी गांव में हैं इन सबका मुखिया कैसे हो जाऊं? बस इससे ज्यादा उसकी आकांक्षा नहीं होती। सबसे बड़ा भिखारी कैसे हो जाऊं?

      गरीब की आकांक्षा भी गरीब होती है। अमीर की आकांक्षा भी अमीर होती है। और यह बड़ा मजा है। तो गरीब के पास अगर हजार रुपये थे दस हजार की सोचता था।

       जब वे दस हजार उसके पास हो गए तो अब वह अमीर हो गया। अब वह लाख की सोचता है और नब्बे हजार का दुख पैदा कर लेता है। इसलिए अमीर आदमी ज्यादा दुख में पड़ता चला जाता है।

     क्योंकि जैसे-जैसे उसकी संपदा बढ़ती है वैसे-वैसे वासना की हिम्मत बढ़ती है। वह सोचता है कि जब दस हजार कमा लिए तो लाख क्यों नहीं कमा सकता बल आ गया। वह कहता है कुछ करके दिखा देंगे। ऐसे ही नहीं चले जाएंगे।

    अब देखो हजार थे दस हजार कर लिए। दस गुने कर लिए तो दस गुना करने की मेरी हिम्मत है। अब दस हजार हैं तो लाख हो सकते हैं क्योंकि दस गुना मैं कर सकता हूं।

     मगर यह कहां रुकेगा? जब लाख हो जाएंगे तो यह दस लाख की सोचने लगेगा ऐसे तुम रोज ही दुख बनाते जाओगे और रोज दुख बड़ा होता जाएगा रोज दुख फैलता चला जाएगा।

     एक दिन तुम अगर पाते हो कि तुम दुख में घिरे खड़े हो सब तरफ दुख से भरे पड़े हो दुख के सागर में डूबे हो तो किसी और की जिम्मेवारी नहीं है।

      तुमने अपनी ही वासनाओं की छाया की तरह दुख पैदा कर लिया है दुख से मुक्त होना है तो सीधे दुख से मुक्त होने का कोई उपाय नहीं है। वासना को समझो। और अब वासनाएं मत फैलाओ।

        सुख का उपाय है जो है उसका आनंद लो जो नहीं है उसकी चिंता न करो। दुख का उपाय है जो है उसकी तो फिकर ही मत लो जो नहीं है उसकी चिंता करो। दुख का अर्थ है अभाव पर ध्यान रखो भाव को भूलो। जो पत्नी तुम्हारे घर में है उसकी फिकर न करो।   

         उसमें क्या रखा है? तुम्हारी पत्नी जो पड़ोसी की पत्नी है वह सुंदर है।

अंग्रेजी में कहावत है दूसरे के बगीचे की घास सदा ज्यादा हरी मालूम होती है। होती भी है मालूम। जब तुम देखते हो दूर से दूसरे का लॉन खूब हरा लगता है।

   तुम्हारा अपना लॉन इतना हरा नहीं मालूम पड़ता। दूसरे का मकान सुंदर मालूम होता है। दूसरे की कार सुंदर मालूम होती है। दूसरे की पत्नी सुंदर मालूम होती है। दौड़ चलती चली जाती है।

सुख का सूत्र है जो तुम्हारे पास है उसके लिए परमात्मा को धन्यवाद दो। जो है वह पर्याप्त है।

ओशो
कहै कबीर मैं पूरा पाया♣️

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