Osho Sambhog se smadhi tak ….. || युवक और सेक्स || 22

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Osho Sambhog se smadhi tak .....  || युवक और सेक्स || 22

Osho Sambhog se smadhi tak ….. || युवक और सेक्स || 22

Osho Sambhog se smadhi tak ….. || युवक और सेक्स || 22 Duniya ka Yuvaa के मन मे हर वक्त सेक्‍स घूमता रहता है ।

Osho Sambhog se smadhi tak ….. || युवक और सेक्स || 22 मे कुछ इस तरह explain kr rhe hai

कि इन्सान सेक्स को हर वक्त सोचने हर समय सेक्स विचारों मे घूमने के कारण उसकी सारी शक्‍ति इसी में लीन और नष्‍ट हो जाती है।

जब तक लोगों की सेक्‍स के इस रोग से मुक्‍ति नहीं होती, तब तक लोगों की प्रतिभा का जन्‍म नहीं हो सकता। प्रतिभा का जन्‍म तो उसी दिन hoga jis din … iss Desh m sex की सहज स्‍वीकृति हो जायेगी।

हम उसे जीवन के एक तथ्‍य की तरह अंगीकार कर लेंगे—प्रेम से, आनंद से—निंदा से नहीं। और निंदा और घृणा का कोई कारण भी नहीं है।

सेक्‍सek alg anubhuti h । वह जीवन की अद्भुत मिस्ट्रि हे। उससे कोई घबरानें की,भागने की जरूरत नहीं है। जिस दिन हम इसे स्‍वीकार कर लेंगे उस दिन इतनी sahi energy le paye ge….


भारत में कि हम न्‍यूटन पैदा कर सकेंगे,हम आइंस्‍टीन पैदा कर सकेंगे। उस दिन हम chand taaro की यात्रा करेंगे। लेकिन अभी नहीं। अभी तो हमारे लड़कों को लड़कियों के शरीर के आस पास परिभ्रमण करने से ही फुरसत नहीं है।

चाँद तारों का परिभ्रमण कौन करेगा। लड़कियां चौबीस घंटे अपने कपड़ों को चुस्‍त करने की कोशिश करें या कि चाँद तारों का विचार करें। यह नहीं हो सकता। यह सब सेक्सुअलिटी का रूप है।

हम शरीर को cloth lessदेखना और दिखाना चाहते है। इसलिए कपड़े चुस्‍त होते चले जाते है।

Yaha beauty की बात नहीं है यह, क्‍योंकि कई बार चुस्‍त कपड़े शरीर को बहुत बेहूदा और भोंडा बना देते है। हां किसी शरीर पर चुस्‍त कपड़े सुंदर भी हो सकते h……par kisi shrir पर ढीले कपड़े सुंदर हो सकते है। और ढीले कपड़े की शान ही और है। ढीले कपड़ों की गरिमा और है। ढीले कपड़ों की पवित्रता और है।

लेकिन वह हमारे ख्‍याल में नहीं आयेगा। हम समझेंगे यह फैशन है, यह कला है, अभिरूचि है, टेस्‍ट है। नहीं ‘’टेस्‍ट’’ नहीं है। अभी रूचि नहीं है। वह जो जिसको ham chhipa रहे है

भीतर दूसरे रास्‍तों से प्रकट होने की कोशिश कर रहा है। लड़के लड़कियों का चक्‍कर काट रहे है। लड़कियां लड़कों के चक्र काट रही है। तो chand taaro का चक्‍कर कौन काटेगा। कौन जायेगा वहां?

और प्रोफेसर? Ve bichare तो बीच में पहरेदार बने हुए खड़े है। ताकि लड़के लड़कियां एक दूसरे के चक्‍कर न काट सकें। कुछ और उनके पास काम है भी नहीं।

जीवन के और परमात्मा के मार्ग में उन्‍हें इन बच्‍चों को नहीं लगाना है। बस, ये सेक्‍स से बचे जायें,इतना ही काम कर दें तो उन्‍हें लगता है कि उनका काम पूरा हो गया।

For English usres

Osho Sambhog se smadhi tak… .. || Youth and Sex || 22

Osho Sambhog se smadhi tak… .. || Youth and Sex || 22 Duniya ka Yuvaa has sex in his mind all the time.

Osho Sambhog se smadhi tak… .. || Youth and Sex || 22 explain something like this

That because of thinking about human sex all the time, because of moving around in sex thoughts all the time, his power gets absorbed and destroyed in this.

Till the time people do not get rid of this disease of sex, the talent of people cannot be born. The birth of talent will take place on the same day hoga jis din… iss Desh m sex

We will accept it as a fact of life — with love, with joy — nott by condemnation. And there is no reason for condemnation and hatred either.

Sex ek alg anubhuti h. She is a wonderful mistress of life. There is no need to run away from him. The day we accept it, on that day so sahi energy le paye ge….

In India that we can produce newtons, we will be able to produce Einstein. That day we will visit chand taaro. but not now. Right now our boys do not have time to revolve around girls’ bodies.

Who will do the moon starry cruises? Girls try to fit their clothes around the clock or think of moon stars. This can not happen. All of this is a form of sexuality.

We want to see and show the body cloth less. Therefore, the clothes keep getting tighter.

It is not a matter of Yaha beauty, because sometimes tight clothes make the body very stupid and unsympathetic. Yes, tight clothes can be beautiful on any body.… Loose clothes on par kisi shrir can be beautiful. And there is more elegance of loose clothes. Loose clothing is more dignity. The purity of loose clothing is more.

But that will not come to our notice. We will understand this is fashion, this is art, interest, test. No, there is no “test”. Not interested right now. The one who is having ham chhipa

The inner is trying to appear from other paths. Boys are biting girls. Girls are cutting the circle of boys. So who will cut the wheel of chand taaro. Who will go there?

And professor? Ve bichare is standing guard in the middle. So that boys do not bite each other. They don’t have anything else to do.

They do not have to engage these children in the path of life and God. Just avoid these sexes, if you do so much work, then they feel that their work is complete.

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